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आचार्य श्री विराग सागर

आचार्य श्री विराग सागर

श्री मज्जिनेन्द्र चतुर्विंशती
तीर्थंकर

आचार्य श्री विशुद्ध सागर

आचार्य श्री विशुद्ध सागर

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा-महोत्सव

प्रेरणा माताजी

प्रेरणा स्तोत्र — श्रमणी आर्यिका श्री 105 विकाम्याश्री माताजी

प्रेरणादायी जीवन परिचय

श्रमणी आर्यिका 105 विकाम्याश्री माताजी का जन्म 1 जुलाई 1986 को मध्यप्रदेश के सागर जिले के रामपुरा नगर में एक धार्मिक एवं संस्कारी जैन परिवार में हुआ। बचपन से ही आपके स्वभाव में दया, करुणा, विनय और जिनवाणी के प्रति गहरी आस्था दिखती थी।

लौकिक शिक्षा सीमित रही पर धार्मिक अध्ययन अत्यंत गहन रहा। गुरुजनों की सेवा, वृद्धजनों के प्रति सम्मान और जिनसंस्कारों के पालन में आप सदैव अग्रणी रहीं।

2002 में पूज्य गणाचार्य विरागसागर जी के सान्निध्य में आध्यात्मिक जागरण हुआ और आपने 24 अप्रैल 2002 को ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया। 13 फरवरी 2006 को श्रवणबेलगोला में भगवान बाहुबली की चरणनिश्रा में भव्य दीक्षा लेकर "आर्यिका विकाम्याश्री" बनीं।

दीक्षा के पश्चात आपने अनेक जैन आगमों एवं सिद्धांत-ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। 21 से अधिक चातुर्मासों में आपने भारतभर में धर्मप्रभावना करते हुए असंख्य भक्तों के हृदय में भक्ति और वैराग्य का दीप प्रज्वलित किया।

आपने लगभग 70,000 किलोमीटर की पदयात्राएँ कर "अहिंसा परमो धर्म:" का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। आप प्रेरक वक्ता, संस्कार-प्रणेत्री, आध्यात्मिक हीलर एवं उत्कृष्ट लेखिका हैं जिनसे लाखों लोग प्रेरणा ग्रहण करते हैं।

आपके मार्गदर्शन में अनेक संस्कार शिविर, तीर्थ निर्माण कार्य एवं भव्य योजनाएँ संपन्न हुईं। मंजवा (काशी–बनारस) में चिंतामणि पार्श्वनाथजी का अतिशयकारी मंदिर आपके निर्देशन का विशेष उदाहरण है।

आपकी साधना, मंत्र-जप एवं करुणा से असंख्य जीवनों में सकारात्मक परिवर्तन आया। आपकी असाधारण सेवाओं हेतु आपको "भारत गौरव" सम्मान से अलंकृत किया गया।

विगत वर्षों से आप वागड़–मेवाड़ क्षेत्र में धर्मप्रभावना कर रही हैं जहाँ श्री विरागविशुद्ध हींकार तीर्थक्षेत्र का निर्माण आपकी प्रेरणा से प्रगति पर है।

वात्सल्यमयी गुरुमाँ का मंगल आशीर्वाद समस्त भक्तों पर बना रहे।

(पूरा जीवन परिचय ऊपर विस्तार से पढ़ें)

ऐतिहासिक आयोजन

500+ जिनबिंब की प्रतिष्ठा का भव्य पंचकल्याणक

भावी जिनालय का शिलान्यास

25 फरवरी 2026, प्रातः 08:00 बजे

पुण्य स्थल

बाहुबली कॉलोनी, संत भवन के पीछे, बांसवाड़ा

आप सपरिवार सादर आमंत्रित

इस पावन अवसर पर आपका हार्दिक स्वागत है

आयोजक

चतुर्विंशती तीर्थंकर समिति, वात्सल्य सेवार्थ फाउंडेशन

आयोजन समिति

अध्यक्ष: दिनेश जी खोड़निया

गौरवाध्यक्ष: अशोक जी वोरा

अतिशय पूर्ण सन्निधि

आदित्य सागर जी महाराज

आदित्य सागर जी महाराज

अप्रमित सागर जी महाराज

अप्रमित सागर जी महाराज

सहज सागर जी महाराज

सहज सागर जी महाराज

क्षुल्लक श्रेयस सागर जी

क्षुल्लक श्रेयस सागर जी

आर्यिका श्री 105 विकाम्याश्री माताजी

आर्यिका श्री 105 विकाम्याश्री माताजी

आर्यिका श्री 105 विगुंजन माताजी

आर्यिका श्री 105 विगुंजन माताजी

स्थान एवं संपर्क सूत्र

आपकी सुविधा के लिए संपूर्ण यात्रा जानकारी

आयोजन स्थल

आयोजन के स्थान

दिव्य पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन राजस्थान के सुंदर स्थलों पर हो रहा है

📍

ह्रींकार तीर्थ

बाँसवाड़ा–उदयपुर रोड, टिम्बा गामड़ी

राजस्थान – 327001

📍

पंचकल्याणक स्थल

बाहुबली कॉलोनी

संत भवन के पीछे, बांसवाड़ा

राजस्थान

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा स्थल एवं ह्रींकार तीर्थक्षेत्र दोनों भिन्न हैं, अतः आपके आगमन के पूर्व इसे सुनिश्चित करें।

अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करें: +91 88390 17577

Maharana Pratap Airport, Udaipur (UDR)

लगभग 3–4 घंटे

निकटतम हवाई अड्डा

≈ 160-170 किमी

उदयपुर एयरपोर्ट – देश भर से जुड़ा

Ratlam Junction (MP)

लगभग 1.5-2 घंटे

निकटतम रेलवे स्टेशन

≈ 80-85 किमी

मुख्य रेल मार्ग एवं कई शहरों से संपर्क

Banswara Bus Stand

⌁ 15–20 मिनट

निकटतम बस स्टैंड

15-20 किमी

RSRTC एवं प्राइवेट बस सुविधा उपलब्ध

Dahod Bus Stand

⌁ लगभग 2–2.5 घंटे

निकटतम बस स्टैंड

100 किमी

दाहोद से बांसवाड़ा हेतु नियमित बस/टैक्सी सुविधा उपलब्ध

पंचकल्याणक मुख्य योजनाएं

प्रत्येक योजना — सीमित स्थान उपलब्ध ✨

सामान्य इन्द्र–इन्द्राणी

₹ 3,100 (प्रत्येक)

कुल स्थान: 24

लौकान्तिक देव

₹ 21,000 (प्रत्येक)

कुल स्थान: 24

24 ध्वजारोहण कर्ता

₹ 1,11,000 (प्रत्येक)

कुल स्थान: 24

मुख्य वेदी

₹ 5,11,000 (प्रत्येक)

कुल स्थान: 24

पंचकल्याणक योजनाएं

दिव्य अवसर के यजमान बनें – अनंत पुण्य अर्जित करें ✨

सामान्य इन्द्र–इन्द्राणी

₹ 3,100

लौकान्तिक देव

₹ 21,000 (प्रत्येक)

24 ध्वजारोहण कर्ता

₹ 1,11,000 (प्रत्येक)

मुख्य वेदी

₹ 5,11,000

आपका योगदान अत्यंत मूल्यवान है

दान करें - पुण्य कमाएं

पूर्ण पारदर्शिता की गारंटी

आपका प्रत्येक रुपया सेवा कार्य में समर्पित किया जाता है — बिना किसी कटौती के।

🔒 सुरक्षित भुगतान • 100% एन्क्रिप्टेड

ह्रींकार तीर्थ पंचकल्याणक समिति

19 से 24 फरवरी 2026

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